Betiyaan

न घर से, न गर्भ से, भागती हैं बेटियां
खुद को सहेज कर रखती हैं बेटियां |
एक जिंदगी जीना चाहती हैं बेटियां |
घुटन से बाहर निकलना चाहती हैं बेटियां |
तुम्हें छोड़ना नहीं चाहती है बेटियां |

तुम उदर में और घर में बेचैन कर देते हो जिन्दगियाँ
कही भी जब खिलखिला नहीं पाती है बेटियां ,
फिर वो ढूँढतीं है ख्वाबों का नया आशियाँ |
शायद इस में हो जाती होंगी गलतियां,
बस रखो घर के दरवाजे खुले,
घर से नहीं भागेगीं बेटियां |

खेलेंगी-कूदेगी, नाचेंगी, गाएंगी, तितलियों की तरह पर फैलाएंगी बेटियां,
गलतियां भी करेगीं तो बेखौफ घर लौट आएंगी बेटियां |
माँ और पिता के साथ मिलकर गलतियां सुधार लेंगी बेटियां.
घर के दरवाजे मत बंद रखना , यही कहती है बेटियां |
घर के दरवाजे बंद होने से भागती हैं बेटियां|

2 Comments

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति है। अंतर्मन को छू गई पंक्तियां।

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s