मनोरोगी

“बेस्ट साईकेटरिस्ट इन एनसीआर”, हाँ, आपने सही पढ़ा! यही सर्च स्ट्रिंग था, पुनीत का. इंटर बटन पुनीत ने दबाया और और एक लम्बी लिस्ट, उसके सामने थी. गूगल सर्च रिजल्ट को पुनीत ब्राउज कर रहा था. कई सारे एक्सपर्ट्स, हॉस्पिटल्स- इनमें से एक को चयनित करना मुश्किल हो रहा था. कुछ डॉक्टरों के प्राइवेट क्लिनिक्स थे, कुछ नामी-गिरामी हॉस्पिटल्स में काम करने वाले थे. एक बात पुनीत ने बहुत ही जल्दी सोच लिया – वो हॉस्पिटल्स में नहीं जाएगा, उसे चाहिये था – पर्सनल अटेंशन और एक दिन का अपॉइन्ट्मन्ट. यह बात डॉक्टर के अपने क्लिनिक्स में पॉसिबल थी. समस्या, कुछ ऐसी थी कि वो दोस्तों से भी सलाह नहीं ले सकता था. उसने चैन की साँस ली, क्योंकि शॉर्टलिस्ट करने का काम हो गया था. जल्दीबाजी में वो कोई निर्णय नहीं लेना चाहता था, इसलिए उसने ब्रेक लेना चाहा. लैपटॉप को लॉक किया और बालकनी में चला गया. गर्मी का दिन था, हाथ में एप्पल जूस का ग्लास लिए हुए, आसमान को देखने की कोशिश करने लगा. इतने पड़ोस की बालकनी से कबूतरों के फड़फड़ाने की आवाज आयी. इस आवाज से वो डर गया. खुद को सयंत किया देखा नीचे बिल्ली चुपचाप बैठी अपने शिकार का तलाश कर रही है. सब के सब मतलबी हैं – यही विचार उसके दिमाग में घूमने लगा. न जाने क्यों उसका दिल तेजी से धड़कने लगा. अचानक उसको किसी ने पीछे से पकड़ लिया – देखा उसकी पत्नी थी, जो उसे साथ में सोने के लिए मनुहार कर रही थी. “तुमने तो मुझे डरा ही दिया,अभी मेरा हार्ट अटैक ही हो जाता”, पुनीत ने अपनी पत्नी से कहा. पत्नी के आग्रह पर वो उसके साथ हो लिया और बेडरूम की ओर अग्रसर हो लिया. थोड़ी से मसखरी उसे सूझी. उसने पत्नी की कमर को दोनों हाथों से पकड़कर खुद को ट्रैन का डब्बा और पत्नी को इंजिन बनाते हुए गाने लगा,” जानू मेरी जान, मैं तेरे कुर्बान. अरे मैं तेरा, तू मेरी जाने सारा हिन्दुस्तान.” मस्ती छोड़ो और चुपचाप मेरे साथ चलो, तुम्हारी ये मधुर आवाज से लोग डर कर जग जायेगें, आप रहम करें, किशोर कुमार जी.”
“आपके आदेश को तामील किया मोहतरमा !”, धीमे स्वर में और एक ही सांस में पुनीत ने अपनी श्रीमती के कान में रख डाली.
शयन कक्ष में दोनों लेट गए, श्रीमती उसकी बाँहों पर सर रखकर उसकी आँखों में आँखे डाल गुनगुनाने लगी – “ख़्वाब का रँग हक़ीक़त में नज़र आया है दिल में धड़कन की तरह कोई उतर आया है आज हर साँस में शहनाइयों सी लहराई है अजनबी कौन हो तुम, जबसे तुम्हें देखा है सारी दुनिया मेरी आँखों में सिमट आई है.” गाते-गाते उसकी आँखे मुंड गयी. पत्नी की तेज होती सांसो से उसने यह तजबीज किया,” श्रीमती निद्रा को वरण कर चुकी हैं. खैर तेज होती साँसों का वो कुछ और भी अर्थ लगा सकता था, खैर अभी उसने ऐसा सोचना वाजिब नहीं समझा फिर भी अपनी श्रीमती को सोया देख कर थोड़ी देर के लिए वो विचलित हो गया. उसका मन थोड़ा सा मचल सा गया. पर उसे याद आया – कैसे विश्वामित्र की तपस्या भंग हो गयी थी मेनका नामक अप्सरा को देखकर. उसने पत्नी के ऊपर कंफर्टर डाल दिया और उसके मस्तक को धीरे से चूम लिया और चल पड़ा लैपटॉप की ओर. कार्य जो अधुरा पड़ा था , उसे निष्पादित करने. धीमे पद-चाप के साथ बाहर निकला, जिससे उसकी श्रीमती की नींद ख़राब नहीं हो. कमरे के दरवाजे को धीरे से सटा दिया और alienware लैपटॉप को अनलॉक किया. उसकी पत्नी उसके लैपटॉप से बहुत चिढ़ती थी.
ये मेरी सौत है, और ये एक दिन मुझे मेरे पति से अलग करके ही रहेगी, आधा तो अलग कर ही दी, मुझे से ज्यादा इस लैपटॉप से प्यार से करते हैं और इसको ज्यादा समय भी देते हैं..ऐसा उलाहना वो हर दिन देती थी.
ये बात सच थी कि वो अपने लैपटॉप से बहुत प्यार करता था पर पत्नी से ज्यादा नहीं.
Intel Core i9 cpu और ३२ gb रैम वाले इस लैपटॉप को वो दीवाना था. गेम खेलना हो या प्रोग्राम लिखना हो, दोनों के लिए blazing फ़ास्ट था. यही दो काम उसके बहुत प्रिय थे. अपने लैपटॉप को प्यार से वो “बेहेमोथ” कहता था.

कमरे में नाईट लैंप मद्धम-मद्धम रौशनी बिखेर रही थी, उसे गर्मी का अहसास हुआ, अपने AC को ऑन किया. जब कमरे का तापमान सामान्य हुआ तो उसे अच्छा लगने लगा. अब wifi का सिग्नल नहीं आ रहा था. उसने राऊटर का रीस्टार्ट किया, अब इन्टरनेट काम कर रहा था. अपने reclining चेयर में धंस कर, उन ५ शार्ट-लिस्टेड डॉक्टर्स के प्रोफाइल्स, रीव्यूज को देख रहा था. अंततोगत्वा, डॉक्टर सारंग सर्वोत्तम लगे. मन ही मन उसने बोला,”डॉक्टर है या देवता ! कितने चमत्कृत करने वाले काम किये हैं इन्होने!
डॉ. सारंग ने Women’s Mental Health पर काफी काम किया था. कोलंबिया यूनिवर्सिटी से Women’s Mental Health में पीएचडी कर रखी थी. बाकी सारे डॉक्टर्स भी अच्छे थे, पर उनकी विशेषज्ञता इस क्षेत्र में नहीं थी. रात में ही अपॉइन्ट्मन्ट बुक कर लिया ऑनलाइन फॉर कम्पलीट डे. सारी समस्याओं को वो एक डायरी में लिख लिया था, जिससे की डॉक्टर को एक्सप्लेन करने में आसानी हो.
२)
सुबह के ९.०० बजे थे, पुनीत, डॉ. सारंग के क्लिनिक पर था. रिसेप्शनिस्ट ने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ पुनीत का स्वागत किया और सामने के सोफे पे पर बैठ जाने का इशारा किया. पुनीत को यह अहसास हुआ – यहाँ भीड़ नहीं के बराबर है. एक अजीब सी शांति पसरी हुई है. भगवान बुद्ध के बड़े-बड़े पोर्ट्रेट चारो तरह लगे हैं. फर्श के मध्य में एक शतदल कमल की आकृति बनी हुई है और उस कमल के मध्य में एक दिव्य रौशनी निकल रही है. पुनीत ये सोचने लगा कि ये क्लिनिक है या आश्रम. थोड़ी देर के लिए वो अपने विचारों में खो गया फिर वो अपने बैग से “ मेंटल प्रोब्लम्स ऑफ़ वोमेन” पढने लगा.
“आप को डॉक्टर सारंग ने अन्दर बुलाया है.” ये आवाज उसके कानों तक पहुँची. उसके सामने वही रिसेप्शनिस्ट खडी थी, जिसने बैठने का इशारा किया था. पुनीत थोडा अकचका सा गया था. खैर, खुद को सयंत करते हुए बोला,”किधर जाना है.”
“प्लीज फॉलो मी”, रिसेप्शनिस्ट ने कहा.
साड़ी में लिपटी हुई वो स्त्री, अनिवर्चनीय, अनिन्दनीय सुन्दरी लग रही थी. अचानक उसके दिल में ख्याल आया – काश ! एयर इंडिया वाले ऐसी ही सुन्दरी को एयर होस्टेस बनाते, तो कितना अच्छा होता! लकड़ी की घुमावदार सीढियों से होते हुए दोनों डॉक्टर के कक्ष की और जा रहे थे. ऐसी सीढियों पर पुनीत को चढ़ने की आदत नहीं थी, तो वो थोडा सा लड़खड़ा गया, पर उस रिसेप्शनिस्ट ने उसे अपने हाथों से पकड़ कर गिरने से बचा लिया. पुनीत मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दे रहा था.
“थैंक यू मैम, आज आपने मुझे लुढ़कने से बचा लिया पर मेरे मन को भटकने से नहीं बचा पायी.”
“क्या, क्या, कहा आपने, मैं समझ नहीं पायी.”
“बस यूं हीं, कुछ भी नहीं.”
कंसल्टेशन रूम के दरवाजे खुले थे.
रिसेप्शनिस्ट ने हाथों से इंगित किया कि अन्दर चले जाएँ.
“स्वागत है आपका”, एक भारी-भरकम आवाज ने उनका स्वागत किया. अपनी बातों को जारी रखते हुए डॉक्टर ने कहा ,”सहज हो जाएँ आप”.
कंसल्टेशन रूम का सेटअप देखकर पुनीत सोच रहा था कि यहाँ कंसल्टेशन होता है या योग. खैर उसने अपनी जिज्ञासा को अपने अन्दर ही छुपाये रखा.
डॉक्टर के निर्देश पर पुनीत ने ड्रेस चेंज कर लिया और फर्श पर बैठ गया. रोगी और चिकित्सक दोनों फर्श पर बैठे थे, सुखासन में.
डॉक्टर सारंग का अपना अलग स्टाइल है काउंसेल करने का, ईलाज करने का.
“क्या लेंगे आप, ग्रीन टी विथ लेमन एंड जिंजर – हॉट और कोल्ड.” डॉ सारंग ने सवाल किया.
“तकल्लुफ की कोई आवश्यकता नहीं है” पुनीत ने सरल भाव से कहा.
“क्या प्रॉब्लम है”?
“समस्या थोड़ी-सी अजीब है डॉक्टर!”
“डॉक्टर से मर्ज नहीं छुपाया जाता, आप निसंकोच बताइए”
“मैं अपनी पत्नी के अजीबोगरीब व्यहार से बहुत ही परेशान हूँ.”
“पत्नी को साथ लेकर क्यों नहीं आये?”
“मैं भागवान का दिल नहीं दुखाना चाहता था.”
“चिकित्सक फिर किस मर्ज की दवा बताएगा.”
पुनीत गंभीर हो गया उसकी आँखें नम होने लगी और अश्रुधारा बहने लगी. सारंग थोड़े परेशान हो गए. ये क्या समस्या आ गयी, ये बच्चों की तरह रो क्यों रहा है? सारंग के लिए वैसे तो ये कोई नया अनुभव नहीं था, उन्हें तो ऐसी स्थितियों से, ऐसी समस्याओं से निपटना बखूबी आता था. उन्होंने उसे रोने दिया और जब अश्रुधार रुक गए तो कहा,” भावनाओं को बहने दो, रोको मत आँसुओं को. ये निकल जाएँ तो मन हल्का हो जाता है.”
“मेरी पत्नी शायद भयंकर मानसिक यंत्रणा से गुजर रही है, मैं उसके दुखों को देख नहीं पाता हूँ, उसे परेशान देख, मैं भी विषादग्रसित हो जाता हूँ. वो मेरी जीवनरेखा है, और जीवनरेखा अगर रुक जायेगी तो मैं भी स्वर्गवासी हो जाऊँगा.”
“आपकी भावनाओं की कद्र करता हूँ. समस्या बताएं हम उसका समाधान निकालेंगे.”
“पत्नी का असामान्य व्यवहार सबके सामने मुखर नहीं होता है, पर जब वो अकेले होती है तब रोती रहती है.”
“ये बात आपको कैसे पता चली.”
“मैंने अपने घर पर उसके असमान्य व्यहार पर नजर रखने के लिए CCTV लगवा रखी है, पर ये बात उसकी जानकारी में नहीं है.”
“आगे बताइये.”
“अपनी उदासी को मुझसे छुपाती है, जब मैं घर पर रहता हूँ, तो एक नकली मुस्कान ओढ़े रहती है.”
“आपकी कोई संतान है”
“मेरी पत्नी संतान नहीं चाहती है, वो मुझसे ऐसा कहती है.”
“क्या आपको लगता है कि आपकी पत्नी को संतान की चाह नहीं है.”
“इस प्रश्न पर हम लोग बाद में आयेंगे ! मैं अपनी पत्नी के अप्रत्याशित व्यवहार से हैरान हूँ.”
” आगे बताइये ”
“एक दिन मेरी पत्नी बच्चों के पुराने कपड़े खरीद कर ले आयी. मैंने पूछा इन वस्त्रों का क्या करना है. कुछ नहीं बोली, निरुत्तर रही. मैंने CCTV footage चेक किया तो देखा मेरे घर में कई सारी भिखारन आयी हुई हैं, वो फर्श पर बैठी हैं और मेरी पत्नी भी उनके साथ ही और उनसे घुल-मिल कर बातें कर रही हैं.
उनके बातचीत की एक झलक देखिये मेरे फ़ोन में –
तुम्हारे कितने बच्चे हैं

और तुम्हारे , दूसरी स्त्री की ओर मुखातिब होते हुए पूछा

अरे तुम लोग इतने बच्चे क्यों करते हो.
देखो मेरे दो बच्चे हैं, दोनों बड़े हो गए है और उनके कपड़े तुम दोनों ले जाओ. ठंढ में काम आ जायेंगे.
ये चप्पल, ये साइकिल, ये जूते, और ये किताबें, सब कुछ ले जाओ, उनको खिलाओ,पढ़ाओ, और उनको अच्छी परवरिश दो. कोई और जरूरत तो मुझे बताओ. मुसकुराते हुए उनको विदा किया.
और उन औरतों के जाने के बाद रो रही है.”

“बहुत ही अजीब व्यवहार!”
हाँ डॉक्टर, आपने सही कहा! श्रीमति का ये व्यवहार मेरी समझ से परे था. उसके व्यवहार को अति सूक्ष्मता से अध्ययन करने के लिए मैंने कार में ट्रैकिंग सिस्टम लगवा दिया.”
“तदोपरांत क्या ज्ञात हुआ!”
“मेरी पत्नी स्त्री विशेषज्ञ को विजिट करती है, और इस विषय पर मुझसे कोई चर्चा नहीं करती है.”
“हो सकता है, उसकी कोई हेल्थ प्रॉब्लम रही है, और उस प्रॉब्लम को आपसे छुपाना चाहती हो.”
“मैं अपनी पत्नी के असमान्य व्यवहार को अध्ययन करते हुए पाया – किसी विशेष दिन यौन क्रिया के लिए जोर देती थी, मेरे मना करने पर विक्षिप्त जैसा व्यहार करने लगती थी, फिर मैं उसकी इस चाह का आदर करने लगा. कुछ दिनों बाद मुझे समझ आया कि वो उन्ही दिनों मुझसे सम्बन्ध बनाना चाहती थी, जब एक स्त्री की उर्वरा शक्ति चरम पर होती है, और जैसे उसे अहसास होता इस बार भी खुशखबर नहीं मिलने वाली है तो उदास हो जाती”
“आप दोनों की कोई संतान नहीं है!”
“आप ने सही कहा, डॉक्टर.”
“सारी समस्याओं की जड़ आप दोनों की संतानहीनता है”
“हाँ डॉक्टर, मेरी पत्नी बाँझ है, वो माँ नहीं बन सकती है”
इतने में डोर पर किसी के नॉक करने की आवाज आयी. डॉक्टर ने डोर ओपन किया तो देखा एक स्त्री अपने बच्चों के साथ खडी है. बच्चे पुनीत की गोद में लिपट गए और पुछने लगे,”पापा, आप यहाँ क्यों आये हो !”
डॉक्टर यही सोच रहा था कि माजरा क्या है, मनोरोगी है कौन, इससे बात करने के बाद तो मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है.
स्त्री ने कहा,” कभी-कभी मेरे पति को पागलपन का दौरा पड़ता है!”
अपने पति को लेकर घर आ गयी
३)
कुछ दिन बीत गए. आज डॉक्टर सारंग के पास कंसल्टेसन के लिए पुनीत की पत्नी आयी हुई थी. उसको देखते ही डॉक्टर घबरा कर अपनी कुर्सी से गिर गए और हकलाते हुए बोले ,” अअअ अआप, यहाँ कैसे !”
“I am really sorry doctor, अपने पति के व्यवहार के लिए और आपको अकारण परेशान करने के लिए “, पुनीत की पत्नी रत्ना ने कहा.
“Its perfectly okay, पर आप यहाँ क्यों आयी हैं, अभी तक मैं आप दोनों का माजरा समझ नहीं पाया हूँ. और आप इतनी डरी क्यों हैं?”
” मैं छुपछुपा कर आयी हूँ अगर मेरे पति को पता चल गया तो हंगामा कर देंगे.” धीरे धीरे सब बताती हूँ., डॉक्टर !”
“जल्दी बताइये, अब जानने का लोभ संवरण नहीं हो रहा है ”
“My husband is pathological liar and glib talker, किसी को भी वो अपनी बातों के जाल में भ्रमित कर सकते हैं और वो कई दिनों तक सही गलत का तजबीज नहीं कर पायेगा, और ऐसा ही आपके साथ हुआ है .”
“आप सही कह रही हैं मोहतरमा !”
“ये देखिये, मेरे पति की रिपोर्ट – हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने की. २ सप्ताह पहले मेंटल हॉस्पिटल से आये हैं.”
डॉक्टर नारंग ने रिपोर्ट को उलट पुलट कर देखा – सच में पुनीत मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती था. खुद से बोले,” ओ माय गॉड ! एक पागल आदमी इतना कन्विक्शन के साथ कैसे बातें कर सकता है.”
“डॉक्टर साहब, ये तो भला हो आपका, आपसे appointment की डिटेल्स मैं देख ली थी , और भागी-भागी आ गयी, अगर न आती, तो न जाने, अभी और कितना दिमाग खाते मेरे पति आपका.”
“आपने मुझे बचा लिया.”
“मेरे पति, मेरे बारे में अनाप-सनाप बोलते रहते हैं, अनर्गल प्रलाप करते रहते हैं, मेरा चरित्र हनन भी करते हैं, मैं तो अब परेशान हो गयी हूँ, समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूँ !” यह कहते कहते डॉक्टर की आँखों में आँखों डालते हुए, वो उनके बहुत ही करीब आ गयी..
डॉक्टर ने खुद को सहज और दूर करते हुए कहा ,”उनकी मेडिसिन्स continue रखिये और ऊपर वाले पर भरोसा, वो ठीक हो जायेंगे.”
“मैं भी ऊपरवाले से यही प्रार्थना करती हूँ.”, अपनी आँखों से बहते आंसू को पोछते हुए रत्ना ने कहा.
स्त्री को रोते देख, डॉक्टर साहेब पसीज गए पर उन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू रखते हुए कहा,” आपकी हम हर संभव मदद करेंगे.”
“बड़ी मेहरबानी डॉक्टर!”
“आपके तो बच्चे हैं न, आपके पति कह रहे थे कि आप बाँझ हैं.”
“अरे डॉक्टर !, मैं बाँझ नहीं हूँ, My husband is suffering from Azoospermia.”
“तो वो दोनों बच्चे!”
“वो हमारे गोद लिए बच्चे हैं.”
“अच्छा”, डॉक्टर ने आश्चर्य मिश्रित शब्दों में कहा.
एक और बात बताना तो मैं भूल ही गयी डॉक्टर. अगर आपके पास टाइम हो तो बता दूँ.
“निसंकोच बताइये.”
“बड़ी मुश्किल से मेरे पति को नयी नौकरी मिली थी उसे भी उन्होंने अपने पागलपन के कारण गँवा दी.”
“ऐसा उसने क्या कर दिया, ऑफिस में ही पागलपन का दौरा आ गया था क्या !”
अपनी आँखों के अश्कों को छुपाते हुए उसने अपने मोबाइल में एक वीडियो क्लिप चला कर डॉक्टर को दे दिया.
एक कॉर्पोरेट ऑफिस में पुनीत ceo के चेम्बर में बैठा हुआ है. उसके कपड़े फटे हैं, बाल बिखरे हैं, जूते फटे हैं, चेहरा पर धूल का अम्बार है. सिक्योरिटी गार्ड उसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं. पुनीत सबको धक्का देकर भगा रहा है.
कुछ लोग आपस में बात कर रहे हैं,” ये पागल सीईओ के चेंबर में कैसे घुस गया. गार्ड लोग क्या कर रहे थे. ”
अरे यार, पागल से कौन भिड़ता है, अचानक ही घुस गया होगा. अब पुनीत इसकी नौकरी तो जाएगी ही और इन गार्डों की नौकरी तो जानी ही है. लोग कहेंगे, ये तो पागल है, पर तुम लोग क्या कर रहे थे जो इसे अंदर आने से नहीं रोक पाए.
अफरातफरी मची हुई थी. पुनीत टेबल पर चढ़ गया और भाषण देने लगा, ” अरे ओ सीईओ! तुम नकली सीईओ हो, मैं असली सीईओ हूँ, तुम्हे मेरी ताकत और कंपनी के कर्मचारियों की ताकत पहचाननी होगी. हम लोगों से कंपनी है, कंपनी से हम नहीं है. तुमने मुझे पहचाना नहीं। तुम्हारी आँखों पर चर्बी छाई हुई है। कंगाल ही कलियुग का कल्कि-अवतार है। मैं ही हूँ इस युग का कल्कि अवतार। आँखें खोलो सीईओ, तुम्हारे चारो ओर हम दरिद्र कर्मचारी नजर आएंगे, ये है हमारा विराट रूप!”
पुनीत की नजरें पल भर के लिए इधर उधर हुई. सिक्योरिटी ने बाज की तरह झपट लिया और उसे सीईओ के कमरे से काफी मश्कत के बाद निकाल दिया. पुनीत उन गार्डो को अपने दातों से काट रहा था. उसके दोनों पैर और हाथ रस्सी से बाँध दिए गए और मुंह पर और आँखों पर कपड़ा बाँध दिया गया. डॉक्टर को बुलाया गया, उसने एक इंजेक्शन लगा दिया और पुनीत वही सो गया.
“इसके बाद क्या हुआ ?”, डॉक्टर ने उत्सुकता से पूछा.
“फिर होना क्या था डॉक्टर, पुनीत को कंपनी से फायर कर दिया गया.”
“अभी आपका घर कैसे चलता है, आप नौकरी करती हैं क्या ?”
“नहीं डॉक्टर, हम अभी फाइनेंसियल क्राइसिस से भी गुजर रहे हैं. सेविंग्स से काम चला रहे हैं. ये ठीक हो जाएँ, बाकी तो सब ठीक हो ही जायगा.एक विनती है डॉक्टर जी आपसे, अगर मेरे पति दुबारा आपके पास आये, तो उनको एंटरटेन कर लेना, उनसे प्यार से बात करना, उन्हें डांटना मत, एक पागल आदमी को प्यार मिलेगा तो वो शायद ठीक होने लगेगा,” यह कहते हुए वो रो पड़ी.
डॉक्टर सोचने लगे, अपने पति का कितना ख़याल रखती है ये स्त्री. स्त्री के आंसू पत्थर को भी पिघला देती हैं. ये तो सामान्य मानव थे.
आज का कंसल्टेशन फी मैंने वैव ऑफ कर दिया है, आप बिलिंग काउंटर पर चली जाना, आपको पैसे लौटा दिए जाएंगे. मैंने आवश्यक निर्देश दे दिए हैं.
” इसकी क्या जरूरत थी, डॉक्टर. अच्छा तो अब मैं चलती हूँ, आप मेरी बातों का मान रखना.”, ये कहते हुए वो धीरे से चल पड़ी.
४)
कुछ दिन बीत गए, अब पुनीत डॉक्टर नारंग के पास आये और कहा,” मेरी पत्नी आपके पास आयी थी न, मैं जानता हूँ, वो आपको परेशान करने आई होगी.”
“एक डॉक्टर अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट के कारण, इस तरह की बातें आपको नहीं बता सकता कि कौन यहाँ था और कौन नहीं आया था.”
“आप तो खामखाह नाराज हो गए, खैर छोड़िये, इन बातों को, कुछ तो करो डॉक्टर, मेरी पत्नी का. उसका पागलपन मुझसे देखा नहीं जाता, देखा नहीं आपने, उस दिन, कैसे मुझे पागल बता रही थी.”

डॉक्टर ने कहा,” क्या हेल्प करूं मैं आपकी!,मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, आपके इस केस के चक्कर में, मैं पागल हो जाऊँगा.”
“डॉक्टर मैं आपकी मदद करता हूँ, कुछ और बताता हूँ, अपनी पत्नी के बारे में, अपने बारे में”
“बताइये, शायद इस से मुझे आपकी प्रॉब्लम सॉल्व करने में मदद मिले
रत्ना और मैं बचपन से ही बहुत अच्छे दोस्त थे. ये दोस्ती, कब प्रेम में बदल गयी, कब हमने एक-दूसरे को दिल दे दिया, पता भी नहीं चला और हम एक-दूजे के लिए हो गए. हम दोनों एक-दूसरे से बेइन्तहां मुहब्बत करने लगे. एक दिन रत्ना मेरी दुल्हन बन गयी और मैं उसका दूल्हा. हम-दोनों एक-दूसरे में खोये रहते थे और एक दिन वो हुआ – जो हम नहीं चाहते थे.
रत्ना बहुत उदास थी, पूछने पर पता चला की वो गर्भवती हो गयी है. मैंने कहा,”ये तो ख़ुशी की बात है.”
“मैं अभी माँ नहीं बनना चाहती हूँ, यह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है.”
“तुम्हारी हर ख़ुशी, मेरी खुशी है, तुम्हारे निर्णय का मैं सम्मान करूंगा.
अंततोगत्वा, उसने गर्भपात करवा लिया. बाद में हमें यह ज्ञात हुआ कि इस प्रक्रिया के कारण, रत्ना अब माँ नहीं बन सकती है, लेकिन वो इस बात को मानने को तैयार नहीं है, वो चुपके-चुपके डॉक्टरों से मिलती है और ईलाज करवाती है, क्या करू डॉक्टर, मुझे मेरी पत्नी का दुख देखा नहीं जाता, एक-दिन मैं ही पागल हो जाऊँगा. अकेले में अपने आप से बात करती है, काल्पनिक संतानों से बात करती है और कहती -क्या खाओगे बेटा,खाना खा लो फिर होमवर्क करना , कभी अपने बाल खोल कर रौद्र रूप लेती और कहती है – मैं डायन हूँ, सबका खून पियूंगी और दूसरे क्षण रोने लगती, मैं पापिन हूँ, मैंने अपने बच्चों को मारा, भगवान् मुझे सजा दे रहा है, इसीलिए भगवान ने मुझे बाँझ बना दिया ”
“चलिए अब मैं सोचता हूँ आपके पत्नी की बीमारी कैसे ठीक होगी. आपको एक बार और आना होगा और अपने आने की सूचना अपनी पत्नी से गुप्त रखनी होगी.”

आप जैसा कहें, मेरी साँसे भी नहीं जान पायेगी कि मैं आपसे मिलने आ रहा हूँ. धन्यवाद डॉक्टर, आप एक इंटरेस्टिंग पर्सन हैं.

गर्मजोशी से हाथें मिलकर डॉक्टर ने पुनीत को विदा क्या.

५)
अब डॉक्टर नारंग बहुत परेशान थे , उन्हें समझ नहीं आ रहा था , दोनों पति-पत्नी में सच कौन बोल रहा है। डॉकटर और वकील जब प्रॉब्लम्स होते हैं तो अपने डॉक्टर या वकील दोस्तों से अपने केस को डिस्कस करते है।

डॉक्टर नारंग जो एक स्थूलकाय व्यक्ति थे और अपनी इन्स्टिंक्टिव diagnosis के लिए जाने जाते थे, वो आज हताश, परेशान और निराश थे, उनकी कुंठा और बेचैनी बढ़ती जा रही थी. अपने चैम्बर में चहल-कदमी करते हुए, उन्होंने अपने दोस्तों को आज की शाम सुरमई करने के लिए बुलाया.
शाम की सारी अपॉइन्ट्मन्टस को कैंसिल कर दिए थे डॉक्टर नारंग ने. सभी को उन्होंने मैसेज (I am sorry के साथ )अपने मोबाइल ऐप्प “Imnaranag” से भिजवा दिया था.
उन्होंने अपने सपोर्ट स्टाफ को बुलाया और बताया कि “अगर कोई आज शाम के लिए अपॉइन्ट्मन्ट मांगे, तो मना कर देना और अगर कोई भी जाए तो उसको फ्यूचर का कोई डेट दे देना, अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.
सपोर्ट स्टाफ भी परेशान थे, डॉकटर के इस अप्रत्याशित व्यवहार से.
बेसब्री से डॉक्टर नारंग शाम की प्रतीक्षा कर रहे थे. घर पर फ़ोन कर बता दिया था आज दोपहर में नहीं आएंगे और शाम को भी देर से आएंगे. घर पर कोई उनकी प्रतीक्षा न करे.
शाम हो चुकी थी. उनके डॉक्टर फ्रेंड्स आ गए थे.
सारी अरेंजमेंट रूफ टॉप पर थी. खुले आसमान के नीचे, रेशम सी मुलायम चाँद की रोशनी के साथ, sandlewood फिनिश वाली टेबल चेयर लगी थी.
टेबल काफी बड़ी थी. उसपर हर्बल हुक्का , हर्बल सिगरेट, सिगरेट की कई ब्रांड (गोल्ड फ्लैक, डनहिल ,कैमल और मार्लबोरो), टोमेटो जूस स्ट्रैट फ्रॉम फार्म, रोस्टेड काजू , कई गिलास और मिनरल वाटर की बोतल पड़े थे.
उनके मित्र डॉक्टर जॉन कुर्सी पर बैठते ही कहा,”I am looking for “Virginia and Turkish tobacco” flavor. Where is it Mr. Narang?”
“Here you go Mr. John,” कैमेल का एक पैकेट पकड़ाते हुए कहा, डॉ नारंग ने कहा.
“Where is the lighter, Dr. Narang”.
“अरे मैं तो भूल ही गया था. उन्होंने अपने अस्सिस्टेंट को आवाज देकर मंगवा लिया फिर छत को बोल्ट कर दिया.
दोस्तों के बीच हेलो-हाय चुके थे. सभी मित्र आराम से बैठ गए थे.

डॉक्टर नारंग के छत पर ही स्विमिंग पूल भी था. उन्होंने अपने दोस्तों से कहा, पूल में नहाकर अपनी थकान मिटा लो. मैंने आपलोगों के लिए स्विमिंग पूल में ठंडा पानी डलवाया है और १० kg देशी गुलाब की खुशबू भी. आप लोग तारो ताजा होकर आइये, फिर मुत्मइन होकर चर्चा करेंगे.

सभी दोस्त स्विमिंग पूल का आनंद उठाकर लौट आये और एक दोस्त ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा .
“बच्चों वाली ड्रिंक पिलाओगे नारंग, असली माल तो टेबल पर दिख ही नहीं रहा है “.
“तू बहुत उतावला होता है, तेरी इसी उतावलेपन के कारण तेरी गर्ल फ्रेंड्स तुम्हे लात मार जाती है.”
“गर्ल फ्रेंड् कहाँ से आ गयी, दारू पीने में, तू भी यार कहाँ की बातें कहाँ ले जाता है” ये कहते हुए वो जाने लगा.
डॉक्टर जॉन ने दोनों के बीच-बचाव किया और नारंग के इस फ्रेंड को रोक लिया, पार्टी छोड़कर जाने से.
इस छोटे-मोटे उठापटक के बीच डॉ नारंग ने टेबल के नीचे से “42 Below” की बोतल निकाली और ड्रिंक तैयार करने लगे. और दोस्तों को बोले ,” ये रही आपकी “ब्लडी मेरी” ड्रिंक. ड्रिंक को लेमन,ओलिव से गार्निश भी कर दिए थे. कई दोस्तों के लिए वोदका विथ टोमेटो जूस का एक्सपीरियंस पहली बार था. सभी लोग इस ब्लडी मेरी को एन्जॉय कर थे।

सिप का आनंद उठाते डॉ नारंग ने अपनी प्रॉब्लम सब के सामने रखी. सभी डॉक्टर मित्र कुछ न कुछ सुझाने लगे.
डॉक्टर जॉन चुपचाप सबकी बात सुनते रहे , अकस्मात उनकी आँखें चमकने लगी. उन्होंने नारंग के कान में कुछ कहा और डॉ नारंग ने सहमती में सर हिला दिया.

पीने पिलाने के दौर में रात में काफी हो चुकी थी. सभी मित्रों ने दिल खोल कर बातें की. किसी ने अपनी बीबी को भला बुरा कहा तो किसी ने बॉस को, तो कोई अपनी महबूबा को याद करता रहा, कोई अपनी तड़कती-भड़कती कहानी सुनाता रहा, कोई अपने रिसर्च की बातें करता रहा, तो कोई अपनी मेडिकल प्रैक्टिस के बारे में बताता रहा.
कुछ मित्र अपना होश गवा बैठे थे और कह रहे थे अभी मैं और पी सकता हूँ, टैंकर हूँ, मुझे चढ़ती ही चढ़ती ही नहीं है, कितनी भी पीला दो.

वैसे मित्रों के लिए डॉक्टर नारंग ने अपने कुछ ड्राइवर्स को आदेश दिया,” इन्हे कार में घर छोड़ आओ.”
नौकरों को आदेश दिया, छत को एक बार फिर से साफ सुथरा कर दिया जाए, और सजा दिया जाए.
उनका एक नौकर उनका बैग उठा कर चल दिया, दूसरा ड्राइवर को गाड़ी लेकर आने के लिए कहा. उनकी सफ़ेद रंग की चमचाती वॉल्वो कार आ गयी. ड्राइवर ने दरवाजा खोला, और डॉक्टर नारंग अपनी कार में बैठ कर अपने बैग से Ipad Pro निकाल कर नेट ब्राउज करने लगे.
वो उस कपल को ढूंढ रहे थे, जिसके बारे में डॉ जॉन ने बताया था. उस कपल का प्रोफाइल और उनके पेपर्स भी मिल गए. उसको देखने के बाद उनकी आँखे चमकने लगी.
रात में सड़क पर ट्रैफिक नहीं थी, वो जल्द ही घर पहुँच गए और इत्मीनान से सो गए.
६)
कुछ दिनों बाद, डॉक्टर नारंग अपने क्लिनिक में बैठे थे. गोली चलने की आवाज सुनकर – एक-साथ एक स्त्री और और एक पुरुष की आवाज गूंजी,”डॉक्टर, ये क्या, कोई चोर आ गया है क्या. दोनों स्त्री-पुरुष क्लिनिक के अलग-अलग कक्ष से निकले और दोनों के मुख से एक ही बात निकली,” अरे तुम यहाँ!” ये थे रत्ना और पुनीत – डॉक्टर की क्लिनिक में.

डॉक्टर पागलों की तरह चीख चिल्ला रहे थे.
“आपको क्या हो गया डॉक्टर!”, दोनों ने एक साथ कहा.
“आज मैं तुम दोनों को मार ही दूंगा, पागल लोग धरती के लिए बोझ होते हैं.”
दोनों डॉक्टर के पैरों में गिर गए और बोले,” हमे छोड़ दो.”
“आज तुम दोनों को सुरधाम जाना ही पड़ेगा. तुम दोनों ने मुझे बहुत परेशान किया है.”
“मुझे माफ़ कर दीजिये डॉक्टर!”
“चलो माफ़ किया. दुनिया में तुम दोनों ही सब से होशियार हो क्या! इतने दिनों से तुम दोनों मिलकर मुझे ख़ुफ़िया बना रहे थे. मैं कुछ दिनों तक खुफिया बनता रहा पर सोचा अब तुम दोनों को खुफिया बनाया जाए.”
“पर आपको इस बात का भान कैसे हुआ”, दोनों ने एक साथ कहा.
“चलो इन बातों को छोडो, अब ये बताओ, अब तक कितने रिसर्च पेपर तुम दोनों ने मिलकर चोरी किये हैं?”
“अब तब हम दोनों ने मिलकर 10 पेपर्स पब्लिश किये हैं. ये सारे चोरी के हैं. पर आपको कैसे समझ में आया.”
उन्होंने संक्षिप्त में बताया कि कैसे उन्होंने सरलोक होम्स का काम किया. कैसे अपने दोस्तों की मदद ली
और तुम दोनों को विश्वास जीतने में कामयाब रहा जिससे तुम दोनों ने मेरे साथ के अपॉइन्ट्मन्ट को आपस में शेयर नहीं किया.

आगे यह भी बताया कि
“मैडम, जब आप आयी थी तो आपने मुझसे से पूछा था,”आप मेडिकल रिसर्च पेपर्स लिखते हैं और जब मैंने हाँ कहा तो आपने पूछा, इसको आप कहाँ रखते हैं और उसका जवाब मैंने नहीं दिया था, और आपकी नजर मेरे बुक सेल्फ पर अटकी थी और टेबल पर पड़े पेज को भी आप घूर रही थी, यहीं से मुझे शक हो गया और फिर मैंने आप दोनों के बारे में नेट पे सर्च किया , दोस्तों से डिस्कस किया तो पता चला कि एक कपल है जो मेडिकल रिसर्च पेपर पब्लिश करता है, मेरा शक आप दोनों पर गया वैसे आप दोनों अपने असली नाम से नहीं लिखते हैं थे पर मुझे लगा कि ये कपल आप ही हैं. मेरे कुछ दोस्तों के रिसर्च पेपर्स भी चोरी हुए हैं, उनसे चर्चा क़ि और उनको आप दोनों के कुछ वीडियो भी दिखाए वो आपको पहचान भी गए फिर मेरा शक विश्वाश में बदल गया.आपके पति का वो रिपोर्ट भी नकली थी और वो वीडियो भी एक शार्ट मूवी का एक दृश्य था. इसका पता मैंने हॉस्पिटल और ऑफिस से करवा लिया था. इन बातों से मेरा शक विश्वास में बदल गया लेकिन मैं आप दोनों की बुद्धिमता से प्रभावित भी हूँ. आइये इस पागलपन का खेल छोड़ते हैं और चाय पीते हैं.”
तीनो जब चाय की चुस्कियों का आनंद ले रहे थे तभी पुलिस आ गयी और दोनों के हाथों में हथकड़ी डाल कर हिरासत में ले ली.

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